चंदन वन डूब गया 3

सोने से दिन, चांदी जैसी हर रात गई,
काहे का रोना जो बीती सो बात गई,
मत लाओ नैनों में नीर कौन समझेगा,
एक बूंद पानी में एक वचन डूब गया।

किशन सरोज

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