चंदन वन डूब गया 4

दाह छुपाने को अब हर पल गाना होगा,
हंसने वालों में रहकर मुस्काना होगा,
घूंघट की ओट किसे होगा संदेह कभी,
रतनारे नयनों में एक सपन डूब गया।

किशन सरोज

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