फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह!

एक बार फिर से आज मैं भारतीय उप महाद्वीप के मशहूर शायर क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ|

वास्तव में ये कवि, शायर और कलाकार ही होते हैं जिनको देश की सीमा में नहीं बांधा जा सकता| क़तील साहब की बहुत सी ग़ज़लों को अनेक भारतीय और पाकिस्तानी गायकों ने गाया है और ये गायक कलाकार भी किसी देश की सीमा के मोहताज नहीं हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है, क़तील शिफाई साहब की यह ग़ज़ल –


दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह,
फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह|

मैनें तुझसे चाँद सितारे कब माँगे,
रौशन दिल बेदार नज़र दे या अल्लाह|

सूरज सी इक चीज़ तो हम सब देख चुके,
सचमुच की अब कोई सहर दे या अल्लाह|

या धरती के ज़ख़्मों पर मरहम रख दे,
या मेरा दिल पत्थर कर दे या अल्लाह|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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