चलो अब यादगारों की अंधेरी कोठरी खोलें!

चलो अब यादगारों की अंधेरी कोठरी खोलें,
कम-अज़-कम एक वो चेहरा तो पहचाना हुआ होगा।

दुष्यंत कुमार

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