क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें!

सब कुछ तो है, क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें,
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता |

निदा फ़ाज़ली

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