ज़ुबां पे दर्द भरी दास्तां चली आई!

आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का एक और बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, यह गीत है पुरानी फिल्म मर्यादा से है, जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा था और कल्याणजी आनंद जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने इसे अनोखे अंदाज में गाया है |

ज़िंदगी में ऐसा भी होता है और अक्सर होता है कि हम खुशियों की आशा करते हैं और हमारे पाले ग़म ही पड़ते हैं, बस ऐसे ही कुछ भाव हैं इस गीत में|

लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी का यह दर्द भरा गीत:

ज़ुबां पे दर्द भरी दास्तां चली आई,
बहार आने से पहले खिजां चली आई|

खुशी की चाह में मैंने उठाये रंज बड़े
मेरा नसीब कि मेरे क़दम जहाँ भी पड़े,
ये बदनसीबी मेरी भी वहाँ चली आई|
ज़ुबां पे दर्द भरी दास्तां चली आई |

उदास रात है वीरान दिल की महफ़िल है,
न हमसफ़र है कोई और न कोई मंज़िल है
ये ज़िंदगी मुझे लेकर कहाँ चली आई|

ज़ुबां पे दर्द भरी दास्तां चली आई
बहार आने से पहले खिजां चली आई|



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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