तुम रहे न तुम, हम रहे न हम!

भारतीय फिल्म संगीत की दुनिया में लता मंगेशकर जी किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं| आज मैं लता मंगेशकर जी द्वारा गुरुदत्त जी की फिल्म – ‘कागज़ के फूल’ के लिए गाये गए एक गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ, जिसका संगीत सचिन दा अर्थात सचिन देव बर्मन जी ने दिया था|

ज़िंदगी में कई बार ऐसा होता है कि हम खुशियों की आशा करते हैं और हमारे पाले ग़म ही पड़ते हैं, इस गीत के बोल ही ऐसे हैं और फिर लता जी ने अपनी प्रस्तुति के द्वारा इसमें पूरा दर्द उंडेल दिया है|

लीजिए प्रस्तुत है लता मंगेशकर जी के स्वर में यह दर्द भरा गीत:



वक़्त ने किया क्या हसीं सितम
तुम रहे न तुम, हम रहे न हम|
वक़्त ने किया क्या हसीं सितम|
तुम रहे न तुम हम रहे न हम
वक़्त ने किया..

बेक़रार दिल इस तरह मिले
जिस तरह कभी हम जुदा न थे
तुम भी खो गए, हम भी खो गए
एक राह पर चलके दो क़दम|

वक़्त ने किया क्या हसीं सितम
तुम रहे न तुम हम रहे न हम|
वक़्त ने किया..


जाएंगे कहाँ सूझता नहीं
चल पड़े मगर रास्ता नहीं|
क्या तलाश है कुछ पता नहीं
बुन रहे हैं दिल, ख़्वाब दम-ब-दम|
वक़्त ने किया क्या हसीं सितम
तुम रहे न तुम हम रहे न हम|
वक़्त ने किया..


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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