फ़ज़ाओं पे नशा तारीं है!

मय बरसती है फ़ज़ाओं पे नशा तारीं है,
मेरे साक़ी ने कहीं जाम उछाले होंगे|

परवेज़ जालंधरी

Leave a Reply

%d bloggers like this: