मेरे अन्दर चली थी आँधी—

मेरे अन्दर चली थी आँधी ठीक उसी दिन पतझड़ की,
जिस दिन अपने जूड़े में उसने कुछ फूल सजाये थे|

क़तील शिफ़ाई

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