साक़ी भी है, शराब भी, आज़ादियाँ भी हैं!

साक़ी भी है, शराब भी, आज़ादियाँ भी हैं,
सब कुछ है इंतज़ाम, चलो मयकदे चलें|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

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