नाम सुनता हैं तुम्हारा तो—

ना त-आरूफ़ ना त-अल्लुक हैं मगर दिल अक्सर,
नाम सुनता हैं तुम्हारा तो उछल पड़ता है|

राहत इन्दौरी

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