मेरी बूढ़ी नानी रहती थीं!

इक ये घर जिस घर में मेरा साज़-ओ-सामाँ रहता है,
इक वो घर जिसमें मेरी बूढ़ी नानी रहती थीं।

जावेद अख़्तर

Leave a Reply