बस्ती तेरी, सहरा तेरा!

कूचे को तेरे छोड़ कर जोगी ही बन जाएं मगर,
जंगल तेरे, पर्वत तेरे, बस्ती तेरी, सहरा तेरा।

इब्ने इंशा

2 Comments

  1. vermavkv says:

    बहुत सुन्दर |

    1. shri.krishna.sharma says:

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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