बस्ती तेरी, सहरा तेरा!

कूचे को तेरे छोड़ कर जोगी ही बन जाएं मगर,
जंगल तेरे, पर्वत तेरे, बस्ती तेरी, सहरा तेरा।

इब्ने इंशा

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