आज ज़िक्र-ए-यार चले!

क़फ़स उदास है यारो सबा से कुछ तो कहो,
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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