किस तरह खेलना छोड़ दे!

तेरी अंगड़ाइयों से मिली, ज़ेहन-ओ- दिल को नई रोशनी,
तेरे जलवों से मेरी नज़र, किस तरह खेलना छोड़ दे|

हसन काज़मी

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