ऐ मेरे दिल-ए-नादान

आज मैं स्वर सम्राज्ञी, कोकिल कंठी- सुश्री लता मंगेशकर जी का गाया एक अमर गीत आपको, उसके लिखित स्वरूप के माध्यम से याद दिला रहा हूँ, आपको इस दर्द भरे गीत का स्मरण अवश्य होगा, जिसे असद भोपाली जी ने लिखा था और रवि जी के संगीत निर्देशन में लता जी द्वारा बहुत पहले गाये गए इस गीत की स्वर लहरी आज भी हमारे मानस में गूँजती है|

लीजिए प्रस्तुत हैं लता मंगेशकर जी द्वारा फिल्म- ‘टावर हाउस’ के लिए गाये गए इस गीत के बोल –

ऐ मेरे दिल-ए-नादान
तू ग़म से न घबराना,
एक दिन तो समझ लेगी
दुनिया तेरा अफ़साना|
ऐ मेरे दिल-ए-नादान …

अरमान भरे दिल में
ज़ख्मों को जगह दे दे
भड़के हुए शोलों को
कुछ और हवा दे दे,
बनती है तो बन जाए
ये ज़िन्दगी अफ़साना|
ऐ मेरे दिल-ए-नादान …


फ़रियाद से क्या हासिल
रोने से नतीजा क्या,
बेकार हैं ये बातें
इन बातों से होगा क्या,
अपना भी घडी भर में
बन जाता है बेगाना
ऐ मेरे दिल-ए-नादान …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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