नींद-सी आंखों में घुली जाती है!

खुद-ब-खुद नींद-सी आंखों में घुली जाती है,
महकी-महकी है शब-ए-गम तेरे बालों की तरह|

जां निसार अख़्तर

2 Comments

    1. shri.krishna.sharma says:

      Thanks a lot ji.

Leave a Reply