ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है!

उसूलों पर जहां आंच आए टकराना ज़रूरी है,
जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है |

वसीम बरेलवी

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