तू इन्तज़ार कर शायद!

जो भी बिछड़े हैं कब मिले हैं “फ़राज़”,
फिर भी तू इन्तज़ार कर शायद|

अहमद फ़राज़

2 Comments

    1. shri.krishna.sharma says:

      Thanks a lot ji.

Leave a Reply