जान और ईमान लेते हैं!

मेरी नज़रें भी ऐसे क़ातिलों का जान ओ ईमां हैं,
निगाहें मिलते ही जो जान और ईमान लेते हैं|

फ़िराक़ गोरखपुरी

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