मस्जिद में ख़ुदा को सज्दे!

शेख़ करता तो है मस्जिद में ख़ुदा को सज्दे,
उस के सज्दों में असर हो ये ज़रूरी तो नहीं|

ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

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