सिर्फ़ ख़य्याम का घर हो!

मय-कशी के लिए ख़ामोश भरी महफ़िल में,
सिर्फ़ ख़य्याम का घर हो ये ज़रूरी तो नहीं|

ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

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