तुम यूँ ही ख़फ़ा रहना !

आज मैं फिर से हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी का एक बहुत प्यारा सा गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| कल के गीत की तरह, यह गीत भी राज कपूर साहब द्वारा अभिनीत फिल्म- ‘दिल ही तो है’ के लिए साहिर लुधियानवी साहब ने लिखा था और इसका संगीत रोशन साहब ने तैयार किया था|

लीजिए प्रस्तुत हैं, कुछ अलग ही अन्दाज़ वाले इस गीत के नटखट बोल, जो आपने अवश्य सुने होंगे:


ग़ुस्से में जो निखरा है उस हुस्न का क्या कहना,
कुछ देर अभी हम से तुम यूँ ही ख़फ़ा रहना
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उस हुस्न के शो’ले की तस्वीर बना लें हम,
उन गर्म निगाहों को सीने से लगा लें हम,
पल-भर इसी आलम में ऐ जान-ए-अदा रहना|
कुछ देर अभी हम से तुम यूँ ही ख़फ़ा रहना |


ये दहका हुआ चेहरा ये बिखरी हुई ज़ुल्फ़ें,
ये बढ़ती हुई धड़कन ये चढ़ती हुई साँसें,
सामान-ए-क़ज़ा हो तुम सामान-ए-क़ज़ा रहना|
कुछ देर अभी हम से तुम यूँ ही ख़फ़ा रहना |


पहले भी हसीं थीं तुम लेकिन ये हक़ीक़त है,
वो हुस्न मुसीबत था ये हुस्न क़यामत है,
औरों से तो बढ़ कर हो ख़ुद से भी सिवा रहना|
कुछ देर अभी हम से तुम यूँ ही ख़फ़ा रहना|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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