पढ़ते हैं सब ताज़ा ग़ज़ल मेरी!

Opened Book on Tree Root

दम साध के पढ़ते हैं सब ताज़ा ग़ज़ल मेरी,
किस लहजे में अबके मैं क्या बात बरतता हूँ ।

राजेश रेड्डी

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