दरिया में बहा दें यादें!

काश मुमकिन हो कि इक काग़ज़ी कश्ती की तरह,
ख़ुदफरामोशी के दरिया में बहा दें यादें|

अहमद फ़राज़

2 Comments

    1. shri.krishna.sharma says:

      Thanks a lot ji.

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