जिनमें नींद ना आए!

क्‍या वो दिन भी दिन हैं, जिनमें दिन भर जी घबराए
क्‍या वो रातें भी रातें हैं जिनमें नींद ना आए।

राही मासूम रज़ा

2 Comments

Leave a Reply