ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो!

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची,
ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर तक पहुँची|

राहत इन्दौरी

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