चारों तरफ से दबाव ऐसा था!

कुछ ऐसी साँसें भी लेनी पड़ीं जो बोझल थीं,
हवा का चारों तरफ से दबाव ऐसा था|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

Leave a Reply