क़दमों पर मैं अपना सर रखूँ!

मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यूँ डर रखूँ,
ज़िंदगी आ तेरे क़दमों पर मैं अपना सर रखूँ |

कुँअर बेचैन

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