सूरज से निकलते रहिए!

हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए,
ज़िंदगी भोर है सूरज से निकलते रहिए|

कुँअर बेचैन

2 Comments

  1. vermavkv says:

    वाह, बहुत खूब |

    1. shri.krishna.sharma says:

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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