कपड़े फाड़े, शोर किया!

जब-जब मौसम झूमा हमने कपड़े फाड़े, शोर किया,
हर मौसम शाइस्ता रहना कोरी दुनियादारी है|

निदा फ़ाज़ली

2 Comments

Leave a Reply