चल मेरे साथ ही चल!

हिन्दी फिल्मों के एक प्रमुख गीतकार और प्रसिद्ध शायर जनाब हसरत जयपुरी जी की एक नज़्म आज शेयर कर रहा हूँ| मुझे ध्यान आता है कि मेरे प्रिय नायक, निर्माता और निर्देशक- राज कपूर साहब की फिल्मों में जहां संगीतकार शुरू की बहुत सारी फिल्मों में शंकर – जयकिशन की जोड़ी होती थी, पुरुष गायक मुकेश जी और मन्ना डे जी होते थे, वहीं गीतकारों की भी एक जोड़ी थी, शैलेन्द्र जी और हसरत जयपुरी जी| शैलेन्द्र जी के बहुत से गीत मैंने शेयर किए हैं, शायद हसरत जयपुरी जी के कुछ कम गीत शेयर किए हैं, आज उनकी एक नज़्म शेयर कर रहा हूँ|

हसरत जयपुरी जी की जो नज़्म मैं आज शेयर कर रहा हूँ, उसे जयपुर के गायकों ज़नाब अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन की प्रसिद्ध जोड़ी ने गाया था| ऐसे ही याद आ रहा है कि आकाशवाणी जयपुर में रहते हुए मैंने वर्ष 1980 से 1983 के बीच बहुत बार इन गायक कलाकारों के साथ चाय पी थी, तब वे प्रोग्राम के सिलसिले में मेरे सहकर्मी रामप्रताप बैरवा जी के पास आते थे|

लीजिए आज प्रस्तुत है जनाब हसरत जयपुरी की लिखी और ज़नाब अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन द्वारा गायी गई यह प्रसिद्ध नज़्म –

चल मेरे साथ ही चल ऐ मेरी जान-ए-ग़ज़ल
इन समाजों के बनाये हुये बंधन से निकल, चल

हम वहाँ जाये जहाँ प्यार पे पहरे न लगें
दिल की दौलत पे जहाँ कोई लुटेरे न लगें
कब है बदला ये ज़माना, तू ज़माने को बदल, चल

प्यार सच्चा हो तो राहें भी निकल आती हैं
बिजलियाँ अर्श से ख़ुद रास्ता दिखलाती हैं
तू भी बिजली की तरह ग़म के अँधेरों से निकल, चल

अपने मिलने पे जहाँ कोई भी उँगली न उठे
अपनी चाहत पे जहाँ कोई दुश्मन न हँसे
छेड़ दे प्यार से तू साज़-ए-मोहब्बत पे ग़ज़ल, चल

पीछे मत देख न शामिल हो गुनाहगारों में
सामने देख कि मंज़िल है तेरी तारों में
बात बनती है अगर दिल में इरादे हों अटल, चल|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********

Leave a Reply