अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है!

अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की,
तुम क्या समझो तुम क्या जानो बात मेरी तन्हाई की|

क़तील शिफ़ाई

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