आस का पंछी दूर उफ़क़ में डूब गया!

उड़ते-उड़ते आस का पंछी दूर उफ़क़ में डूब गया,
रोते-रोते बैठ गई आवाज़ किसी सौदाई की|

क़तील शिफ़ाई

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