वो दौलत क्या वो ख़ज़ाना क्या!

उस हुस्न के सच्चे मोती को हम देख सकें पर छू न सकें।
जिसे देख सकें पर छू न सकें वो दौलत क्या वो ख़ज़ाना क्या॥

इब्ने इंशा

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