तहे-गर्द होगा दबा हुआ!

वही ख़त के जिसपे जगह-जगह, दो महकते होंठों के चाँद थे,
किसी भूले बिसरे से ताक़ पर, तहे-गर्द होगा दबा हुआ।

बशीर बद्र

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