ये नये मिज़ाज का शहर है!

कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नये मिज़ाज का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो|

बशीर बद्र

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