तोहमत मेरे नाम तक न पहुँचे!

ग़मे-आशिक़ी से कह दो रहे–आम तक न पहुँचे,
मुझे ख़ौफ़ है ये तोहमत मेरे नाम तक न पहुँचे।

शकील बदायूँनी

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