सलाम तक न पहुँचे!

ये अदा-ए-बेनियाज़ी तुझे बेवफ़ा मुबारक,
मगर ऐसी बेरुख़ी क्या कि सलाम तक न पहुँचे।

शकील बदायूँनी

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