क्या जाने किस भेस में बाबा!

आज एक बार फिर से मैं हिन्दी फिल्म जगत के एक अनूठे गीतकार स्वर्गीय पंडित भरत व्यास जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| भरत व्यास जी ने हिन्दी फिल्मों को कुछ बहुत प्यारे गीत दिए हैं, जैसे- ‘आधा है चंद्रमा, रात आधी’, ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’, ‘आ लौट के आ जा मेरे मीत’, ‘ज्योत से ज्योत जलाते चलो’ आदि-आदि|

लीजिए आज प्रस्तुत है पंडित भरत व्यास जी का यह गीत-

बड़े प्यार से मिलना सबसे
दुनिया में इंसान रे
क्या जाने किस भेस में बाबा
मिल जाए भगवान रे|

कौन बड़ा है कौन है छोटा
ऊँचा कौन और नीचा
प्रेम के जल से सभी को सींचा
यह है प्रभू का बग़ीचा|
मत खींचों तुम दीवारें
इंसानों के दरमियान रे
क्या जाने किस भेस में बाबा
मिल जाए भगवान रे|


ओ महंत जी
तुम महंत जी खोज रहे
उन्हें मोती की लड़ियों में,
प्रभू को मोती की लड़ियों में|
कभी उन्हें ढूँढा क्या
ग़रीबों की अँतड़ियों में|
दीन जनों के अँसुवन में,
क्या कभी किया है स्नान रे|

क्या जाने किस भेस में बाबा
मिल जाए भगवान रे|


क्या जाने कब श्याम मुरारी
आ जावे बन कर के भिखारी|
लौट न जाए कभी द्वार से,
बिना लिए कुछ दान रे|
क्या जाने किस भेस में बाबा
मिल जाए भगवान रे|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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