तुम जहाँ कहो!

आज श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अशोक वाजपेयी जी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह जी के काफी नजदीक थे, वे साहित्य और संस्कृति से जुड़े अनेक पदों पर भी आसीन रहे| भोपाल के भारत भवन की परिकल्पना भी वाजपेयी जी की ही थी जो आज साहित्य और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है|

लीजिए आज प्रस्तुत है अशोक वाजपेयी जी की यह कविता–

तुम जहाँ कहो
वहाँ चले जायेंगे
दूसरे मकान में
अँधेरे भविष्य में
न कहीं पहुँचने वाली ट्रेन में|

अपना बस्ता-बोरिया उठाकर
रद्दी के बोझ सा
जीवन को पीठ पर लादकर
जहाँ कहो वहाँ चले जायेंगे,
वापस इस शहर
इस चौगान, इस आँगन में नहीं आयेंगे|

वहीं पक्षी बनेंगे, वृक्ष बनेंगे
फूल या शब्द बन जायेंगे
जहाँ तुम कभी खुद नहीं आना चाहोगे
वहाँ तुम कहो तो
चले जायेंगे|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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