ख़ता हो, उसी को सज़ा मिले!

इस दौर ए मुंसिफ़ी में ज़रूरी नहीं ‘वसीम,
जिस शख्स की ख़ता हो, उसी को सज़ा मिले|

वसीम बरेलवी

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