तेरे साहिलों पे खिला था जो!

तुझे चाँद बन के मिला था जो, तेरे साहिलों पे खिला था जो,
वो था एक दरिया विसाल का, सो उतर गया उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

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