नहीं अक्स कोई भी मुस्तक़िल!

ये जो रात दिन का है खेल सा, उसे देख इसपे यकीं न कर,
नहीं अक्स कोई भी मुस्तक़िल सरे-आईना उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

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