वो तेरे नसीब की बारिशें!

वो तेरे नसीब की बारिशें, किसी और छत पे बरस गईं,
दिले-बेख़बर मेरी बात सुन, उसे भूल जा उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

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