वो ठहरता क्या कि गुजरा तक नहीं!

वो ठहरता क्या कि गुजरा तक नहीं जिसके लिए,
घर तो घर, हर रास्ता, आरास्ता* मैंने किया|

*सजाया
अहमद फ़राज़

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