आलमे-दीवानगी है और मैं हूं!

अकेला इश्क़ है हिज्रो-विसाल* कुछ भी नहीं,
बस एक आलमे-दीवानगी है और मैं हूं|

(*विरह और मिलन)

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

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