हमेशा की तरह!

एक बार फिर से मैं आज श्रेष्ठ गीत कवि और बहुत अच्छे इंसान, मेरे लिए बड़े भाई की तरह रहे स्वर्गीय किशन सरोज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| किशन सरोज जी के कुछ गीत तो ऐसे हैं कि उनको सुनकर आँखों में आँसू आ जाते हैं और हम बहुत कुछ सोचने को मजबूर हो जाते हैं|
लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय किशन सरोज जी की यह ग़ज़ल जो सामाजिक सरोकार से जुड़ी है –

गालियाँ, गोलियाँ सब ओर हमेशा की तरह,
और चुपचाप हैं कमज़ोर हमेशा की तरह ।

काली मारूति में उठा ले गए फिर एक लड़की,
झुग्गियों में, लो मचा शोर हमेशा की तरह ।

गांव जा पाऊँ तो पूछूँ कि छत्तों पर अब भी,
नाचने आते हैं क्या मोर हमेशा की तरह ।

बेटियों से भी हमें आँख मिलाने की न ताब,
दिल में बैठा है कोई चोर हमेशा की तरह ।

कैसी घड़ियों में लड़ी प्रीति तुम्हारी ऐ किशन !
आज तक गीले हैं दृग-कोर हमेशा की तरह ।


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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