धूप नहीं निकली आफ़ताब के साथ!

कटेगा देखिए दिन जाने किस अज़ाब* के साथ,
कि आज धूप नहीं निकली आफ़ताब के साथ|
*कष्ट, उत्पीड़न
शहरयार

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