दो-चार दुकानों से बनाए रखना!

दिन को दिन, रात को जो रात नहीं कहते हैं,
फ़ासले उनके बयानों से बनाए रखना|

एक बाज़ार है दुनिया जो अगर ‘राही जी’,
तुम भी दो-चार दुकानों से बनाए रखना|

बालस्वरूप राही

Leave a Reply